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Pracin Bharatiya Veshabhusha c6.3

Prācīn Bhāratīya Veśabhūṣā c6.3

Language
Hindi

c6.3

जब सिंधु सभ्यता के बाद ऐतिहासिक अंधकार का परदा उठता है तो हमें वैदिकयुग का दर्शन मिलता है, और भारत की आरंभिक आर्य सभ्यता का दर्शन कराने के लिए हमारे सामने ऋग्वेद के मंत्र आते हैं। लेकिन वैदिक सभ्यता कोई एक काल विशेष तक सीमित नहीं थी वह तो १५०० ई० पू० से लेकर करीब ५०० ई० पू० तक बढ़ती और प्रसरित होती रही । पहले संहिताएं बनीं, बाद में ब्राह्मण ग्रंथ, और अंत में उपनिषद् और सूत्र ग्रंथ । काल क्रम के पैमाने में आगे या पीछे होने से वैदिक साहित्य में भी एक ऐतिहासिक विकास क्रम पाया जाता है। वैदिक साहित्य के विभिन्न ग्रंथों के समय निर्धारित करने की विद्वानों ने चेष्टा की है लेकिन अभी तक वे दृढ़ता के साथ वैदिक ग्रंथों का समय निश्चित नहीं कर सके हैं।