Pracin Bharatiya Veshabhusha c6.5
Prācīn Bhāratīya Veśabhūṣā c6.5
- Language
- Hindi
c6.5
तर्क की तराजू पर यह तौल कर देखना पड़ता है कि पलड़ा किस पक्ष का भारी है और उसी के अनुसार हमें अपनी राय कायम करनी पड़ती है। ऐसे समय हमें पुरातत्व का कोई सहारा न मिलना बड़ा खलता है क्योंकि साहित्य तो साहित्य ही है केवल उसी के सहारे हम उस वैज्ञानिक तथ्य तक नहीं पहुंच सके जिस पर हम वैज्ञानिक पुरातत्व की खोजों से पहुंच सकते हैं। पुरातत्व के सहारे हम सभ्यता संबंधी साहित्यिक उद्धरणों की जांच पड़ताल करके उनके कालसम्बन्धी एक विशेष निष्कर्ष पर पहुंच सकते हैं, पर कोरे साहित्य से और ऐसे साहित्य से जिसका काल अभी विवादग्रस्त है हमारा विशेष काम नहीं निकल सकता। लेकिन जब हमारे पास पुरातत्व के साधन नहीं हैं तो हमें लाचार होकर साहित्य का आश्रय लेना ही पड़ता है। फिर चाहे उससे निकाले गये नतीजे कितने ही विवादग्रस्त क्यों न हों।